श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 28: युधिष्ठिरकी महिमा कहते हुए भीष्मकी पाण्डवोंके अन्वेषणके विषयमें सम्मति  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  4.28.29 
त्यक्तवाक्यानृतस्तात शुभकल्याणमङ्गल:।
शुभार्थेप्सु: शुभमतिर्यत्र राजा युधिष्ठिर:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
पिताश्री! जहाँ राजा युधिष्ठिर रहेंगे, वहाँ के लोग झूठ का त्याग करने वाले, शुभचित्त, कल्याण और सौभाग्य से युक्त, शुभ वस्तुओं की इच्छा रखने वाले और शुभ में ही मन लगाने वाले होंगे॥ 29॥
 
Father! Where King Yudhishthira lives, the people there will be those who renounce lying, will be auspicious, filled with welfare and good fortune, desirous of obtaining auspicious things and will have their minds set on auspiciousness only.॥ 29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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