श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 28: युधिष्ठिरकी महिमा कहते हुए भीष्मकी पाण्डवोंके अन्वेषणके विषयमें सम्मति  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  4.28.27 
देवतातिथिपूजासु सर्वभावानुरागवान्।
इष्टदानो महोत्साह: स्वस्वधर्मपरायण:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
सब लोग भगवान् और अतिथि-पूजन में पूर्ण श्रद्धा रखेंगे। सब लोग दान देने में प्रीति रखेंगे, सबमें उत्साह रहेगा और सब लोग अपने-अपने धर्म का पालन करने में तत्पर रहेंगे॥ 27॥
 
‘Everyone will have complete devotion towards worshipping God and guests. Everyone will love giving charity, everyone will be filled with great enthusiasm and everyone will be ready to follow their respective religions.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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