श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 28: युधिष्ठिरकी महिमा कहते हुए भीष्मकी पाण्डवोंके अन्वेषणके विषयमें सम्मति  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  4.28.26 
देशे तस्मिन् भविष्यन्ति तात पाण्डवसंयुते।
सम्प्रीतिमान् जनस्तत्र संतुष्ट: शुचिरव्यय:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
'पिताजी! पाण्डवों से युक्त देश में ये सब विशेषताएँ होंगी। वहाँ के लोग सुखी, संतुष्ट, पवित्र और निर्विकार होंगे।॥ 26॥
 
‘Father! The country united with the Pandavas will have all these specialties. The people there will be happy, contented, pure and without any vices.॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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