श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 28: युधिष्ठिरकी महिमा कहते हुए भीष्मकी पाण्डवोंके अन्वेषणके विषयमें सम्मति  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  4.28.25 
धर्माश्च तत्र सर्वैस्तु सेविताश्च द्विजातिभि:।
स्वै: स्वैर्गुणैश्च संयुक्ता अस्मिन् वर्षे त्रयोदशे॥ २५॥
 
 
अनुवाद
इस तेरहवें वर्ष में राजा युधिष्ठिर जहाँ भी रहेंगे, वहाँ सभी द्विज (ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य) अपने-अपने धर्म का पालन करते हुए रहेंगे और वे धर्म भी उनके गुणों और प्रभाव से परिपूर्ण होंगे॥ 25॥
 
Wherever King Yudhishthira will be during this thirteenth year, all the Dwijas (Brahmins, Kshatriyas and Vaishyas) there will be following their respective religions and the religions will also be full of their virtues and influence.॥ 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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