श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 28: युधिष्ठिरकी महिमा कहते हुए भीष्मकी पाण्डवोंके अन्वेषणके विषयमें सम्मति  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  4.28.24 
रसा: स्पर्शाश्च गन्धाश्च शब्दाश्चापि गुणान्विता:।
दृश्यानि च प्रसन्नानि यत्र राजा युधिष्ठिर:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
जहाँ राजा युधिष्ठिर होंगे, वहाँ रसना, स्पर्श, गंध और शब्द - ये सभी इन्द्रियाँ लाभदायक होंगी और मन को प्रसन्न करने वाले दृश्य देखने को मिलेंगे॥ 24॥
 
Wherever King Yudhishthira is, there all the senses - taste, touch, smell and sound - will be beneficial, and one will get to see scenes that please the mind.॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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