श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 28: युधिष्ठिरकी महिमा कहते हुए भीष्मकी पाण्डवोंके अन्वेषणके विषयमें सम्मति  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  4.28.21 
वायुश्च सुखसंस्पर्शो निष्प्रतीपं च दर्शनम्।
न भयं त्वाविशेत् तत्र यत्र राजा युधिष्ठिर:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
वहाँ शीतल और मंद वायु बहेगी जिसका स्पर्श सुखदायक होगा। धर्म और ब्रह्म के स्वरूप के विचार कपट से रहित होंगे। जहाँ राजा युधिष्ठिर होंगे, वहाँ भय प्रवेश नहीं कर सकता॥ 21॥
 
‘There will be a cool and gentle breeze blowing whose touch is soothing. The thoughts about the nature of Dharma and Brahma will be devoid of hypocrisy. Where King Yudhishthira is, fear cannot enter.॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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