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श्लोक 4.28.19  |
सदा च तत्र पर्जन्य: सम्यग्वर्षी न संशय:।
सम्पन्नसस्या च मही निरातङ्का भविष्यति॥ १९॥ |
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| अनुवाद |
| ‘इसमें कोई संदेह नहीं कि वहाँ बादल सदैव अच्छी तरह वर्षा करते होंगे। वहाँ की भूमि पर फसलें फलती-फूलती होंगी और वहाँ रहने वाले लोग पूर्णतः निर्भय होंगे।॥19॥ |
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| ‘There is no doubt that the clouds would always rain properly there. The crops would flourish on the land there and the people living there would be completely fearless.॥ 19॥ |
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