श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 28: युधिष्ठिरकी महिमा कहते हुए भीष्मकी पाण्डवोंके अन्वेषणके विषयमें सम्मति  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  4.28.19 
सदा च तत्र पर्जन्य: सम्यग्वर्षी न संशय:।
सम्पन्नसस्या च मही निरातङ्का भविष्यति॥ १९॥
 
 
अनुवाद
‘इसमें कोई संदेह नहीं कि वहाँ बादल सदैव अच्छी तरह वर्षा करते होंगे। वहाँ की भूमि पर फसलें फलती-फूलती होंगी और वहाँ रहने वाले लोग पूर्णतः निर्भय होंगे।॥19॥
 
‘There is no doubt that the clouds would always rain properly there. The crops would flourish on the land there and the people living there would be completely fearless.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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