श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 28: युधिष्ठिरकी महिमा कहते हुए भीष्मकी पाण्डवोंके अन्वेषणके विषयमें सम्मति  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  4.28.18 
ब्रह्मघोषाश्च भूयांस: पूर्णाहुत्यस्तथैव च।
क्रतवश्च भविष्यन्ति भूयांसो भूरिदक्षिणा:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
उस देश या क्षेत्र में वेदों की ध्वनियाँ बहुत सुनाई देंगी, यज्ञों में पूर्णाहुति दी जाएगी और बड़ी-बड़ी दक्षिणाओं सहित अनेक यज्ञ होंगे॥18॥
 
‘In that country or region the sounds of the Vedas would be heard in abundance, full offerings would be made in the yajnas and many yajnas would be taking place with large dakshinas.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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