| श्री महाभारत » पर्व 4: विराट पर्व » अध्याय 28: युधिष्ठिरकी महिमा कहते हुए भीष्मकी पाण्डवोंके अन्वेषणके विषयमें सम्मति » श्लोक 16 |
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| | | | श्लोक 4.28.16  | प्रियवादी सदा दान्तो भव्य: सत्यपरो जन:।
हृष्ट: पुष्ट: शुचिर्दक्षो यत्र राजा युधिष्ठिर:॥ १६॥ | | | | | | अनुवाद | | राजा युधिष्ठिर जहाँ भी रहेंगे, वहाँ के लोग सदैव मधुरभाषी, संयमी, सौभाग्यशाली, सत्यवादी, स्वस्थ, पवित्र और अपने कार्य में कुशल होंगे॥16॥ | | | | Wherever King Yudhishthira will be, the people there will always be pleasant-spoken, self-controlled, fortunate, truthful, healthy, pure and efficient in their work.॥ 16॥ | | ✨ ai-generated | | |
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