श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 28: युधिष्ठिरकी महिमा कहते हुए भीष्मकी पाण्डवोंके अन्वेषणके विषयमें सम्मति  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  4.28.13-14h 
तत्र नाहं तथा मन्ये यथायमितरो जन:॥ १३॥
निवासं धर्मराजस्य वर्षेऽस्मिन् वै त्रयोदशे।
 
 
अनुवाद
‘अतः इस तेरहवें वर्ष में धर्मराज युधिष्ठिर के निवास के विषय में अन्य लोगों की जो राय है, उसे मैं नहीं मानता। ॥13 1/2॥
 
‘Therefore, I do not believe in the opinion of other people regarding the residence of Dharmaraja Yudhishthira in this thirteenth year. ॥ 13 1/2 ॥
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