श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 26: दुर्योधनका सभासदोंसे पाण्डवोंका पता लगानेके लिये परामर्श तथा इस विषयमें कर्ण और दु:शासनकी सम्मति  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.26.1 
वैशम्पायन उवाच
ततो दुर्योधनो राजा ज्ञात्वा तेषां वचस्तदा।
चिरमन्तर्मना भूत्वा प्रत्युवाच सभासद:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- जनमेजय! तत्पश्चात् राजा दुर्योधन दूतों की बातों पर विचार करते हुए बहुत देर तक मन में कुछ सोचता रहा। तत्पश्चात् उसने सभासदों से कहा-॥1॥
 
Vaishampayana says- Janamejaya! After that king Duryodhan after thinking about the messengers' words kept thinking something in his mind for a long time. After that he said to the members of the court-॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)