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mahabharat 4.25.20-21: राजन! मत्स्यराज विराट का वह पराक्रमी सेनापति सूतपुत्र कीचक, जिसने विशाल सेना के बल पर त्रिगर्त देश और उसके निवासियों को तहस-नहस कर दिया था, भरत! गन्धर्वों ने रात्रि में गुप्त रूप से उस दुष्टात्मा को उसके भाइयों सहित मार डाला है। अब वह श्मशान में सो रहा है।   |   mahabharat अध्याय 4.25: दुर्योधनके पास उसके गुप्तचरोंका आना और उनका पाण्डवोंके विषयमें कुछ पता न लगा, यह बताकर कीचकवधका वृत्तान्त सुनाना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 25: दुर्योधनके पास उसके गुप्तचरोंका आना और उनका पाण्डवोंके विषयमें कुछ पता न लगा, यह बताकर कीचकवधका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  4.25.20-21 
येन त्रिगर्ता निहता बलेन महता नृप।
सूतेन राज्ञो मत्स्यस्य कीचकेन बलीयसा॥ २०॥
स हत: पतित: शेते गन्धर्वैर्निशि भारत।
अदृश्यमानैर्दुष्टात्मा भ्रातृभि: सह सोदरै:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
राजन! मत्स्यराज विराट का वह पराक्रमी सेनापति सूतपुत्र कीचक, जिसने विशाल सेना के बल पर त्रिगर्त देश और उसके निवासियों को तहस-नहस कर दिया था, भरत! गन्धर्वों ने रात्रि में गुप्त रूप से उस दुष्टात्मा को उसके भाइयों सहित मार डाला है। अब वह श्मशान में सो रहा है।
 
King! That mighty commander of Matsya king Virat, Sutaputra Kichaka, who had devastated the Trigarta country and its inhabitants with the help of a huge army, Bhaarat! The Gandharvas have secretly killed that evil soul along with his brothers in the night. Now he is lying asleep in the cremation ground.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)