श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 24: द्रौपदीका राजमहलमें लौटकर आना और बृहन्नला एवं सुदेष्णासे उसकी बातचीत  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  4.24.29 
सैरन्ध्रॺुवाच
त्रयोदशाहमात्रं मे राजा क्षाम्यतु भामिनि।
कृतकृत्या भविष्यन्ति गन्धर्वास्ते न संशय:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
सैरन्ध्री बोली- भामिनी! मुझे तेरह दिन और क्षमा करो। निःसंदेह, तब तक गन्धर्वों का अभीष्ट कार्य पूर्ण हो जायेगा- वे धन्य हो जायेंगे॥29॥
 
Sairandhri said- Bhamini! Please forgive me for thirteen more days. Undoubtedly, by then the desired work of the Gandharvas will be completed - they will be blessed. 29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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