श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 24: द्रौपदीका राजमहलमें लौटकर आना और बृहन्नला एवं सुदेष्णासे उसकी बातचीत  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  4.24.28 
राजा बिभेति ते भद्रे गन्धर्वेभ्य: पराभवात्।
त्वं चापि तरुणी सुभ्रु रूपेणाप्रतिमा भुवि।
पुंसामिष्टश्च विषयो गन्धर्वाश्चातिकोपना:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
भद्रे! महाराज आपके गन्धर्वों द्वारा होने वाली पराजय से भयभीत हैं। शुभ्र! आप अभी युवा हैं, इस संसार में कोई भी स्त्री आपकी सुंदरता के समान नहीं है। पुरुष सदैव विषय-भोगों के शौकीन होते हैं; (इसलिए उनके प्रमाद करने की संभावना बनी रहती है।) यहाँ आपके गन्धर्व बड़े क्रोधी हैं (कौन जाने वे किसी समय क्या कर बैठें?)॥28॥
 
Bhadre! Maharaj is afraid of the defeat that will be caused by your Gandharvas. Subhru! You are still young, there is no woman in this world who can match you in beauty. Men always like sensual pleasures; (therefore there is a possibility of them being negligent.) Here your Gandharvas are very short-tempered (who knows what they might do at any time?)'॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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