vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 4: विराट पर्व
»
अध्याय 24: द्रौपदीका राजमहलमें लौटकर आना और बृहन्नला एवं सुदेष्णासे उसकी बातचीत
»
श्लोक 25
श्लोक
4.24.25
न तु केनचिदत्यन्तं कस्यचिद्धृदयं क्वचित्।
वेदितुं शक्यते नूनं तेन मां नावबुध्यसे॥ २५॥
अनुवाद
निस्सन्देह, कोई भी किसी दूसरे के हृदय को कभी भी पूर्णतः नहीं समझ सकता, इसीलिए तुम मुझे नहीं समझ सकते; तुम मेरी पीड़ा का अनुभव नहीं कर सकते ॥25॥
Of course, no one can ever completely understand another person's heart, that is why you cannot understand me; you cannot feel my pain. ॥ 25॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas