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श्लोक 4.24.21  |
सैरन्ध्रॺुवाच
बृहन्नले किं नु तव सैरन्ध्रॺा कार्यमद्य वै।
या त्वं वससि कल्याणि सदा कन्यापुरे सुखम्॥ २१॥ |
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| अनुवाद |
| सैरन्ध्री बोली - "बृहन्नले! अब सैरन्ध्री से तुम्हारा क्या सम्बन्ध है? कल्याणी! तुम इन कन्याओं के अन्तःपुर में सुखपूर्वक रहो।" |
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| Sairandhri said - Brihannale! What do you have to do with Sairandhri now? Kalyani! You happily live in the harem of these girls. |
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