श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 24: द्रौपदीका राजमहलमें लौटकर आना और बृहन्नला एवं सुदेष्णासे उसकी बातचीत  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  4.24.17 
वैशम्पायन उवाच
तत: सा नर्तनागारे धनंजयमपश्यत।
राज्ञ: कन्या विराटस्य नर्तयानं महाभुजम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- राजन! तत्पश्चात् द्रौपदी ने नृत्यशाला में पहुँचकर महाबली अर्जुन को देखा, जो राजा विराट की पुत्रियों को नृत्य की शिक्षा दे रहे थे॥17॥
 
Vaishampayanji says- Rajan! After that, Draupadi reached the dance hall and saw the mighty Arjuna, who was teaching dance to the daughters of King Virat. 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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