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श्लोक 4.24.10  |
न हि त्वामुत्सहे वक्तुं स्वयं गन्धर्वरक्षिताम्।
स्त्रियास्त्वदोषस्तां वक्तुमतस्त्वां प्रब्रवीम्यहम्॥ १०॥ |
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| अनुवाद |
| ‘आप गन्धर्वों से सुरक्षित हैं। पुरुष होने के कारण मैं स्वयं आपसे कुछ नहीं कह सकता। किन्तु स्त्री द्वारा आपसे यह सब कहने में कोई हानि नहीं है; अतः मैं स्वयं अपनी पत्नी के द्वारा आपसे यह सब कह रहा हूँ।’॥10॥ |
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| ‘You are safe from the Gandharvas. Being a man, I cannot say anything to you myself. But there is no harm in a woman saying all this to you; hence I am telling you all this myself through my wife.’॥10॥ |
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