श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 24: द्रौपदीका राजमहलमें लौटकर आना और बृहन्नला एवं सुदेष्णासे उसकी बातचीत  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.24.10 
न हि त्वामुत्सहे वक्तुं स्वयं गन्धर्वरक्षिताम्।
स्त्रियास्त्वदोषस्तां वक्तुमतस्त्वां प्रब्रवीम्यहम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
‘आप गन्धर्वों से सुरक्षित हैं। पुरुष होने के कारण मैं स्वयं आपसे कुछ नहीं कह सकता। किन्तु स्त्री द्वारा आपसे यह सब कहने में कोई हानि नहीं है; अतः मैं स्वयं अपनी पत्नी के द्वारा आपसे यह सब कह रहा हूँ।’॥10॥
 
‘You are safe from the Gandharvas. Being a man, I cannot say anything to you myself. But there is no harm in a woman saying all this to you; hence I am telling you all this myself through my wife.’॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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