Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.23.6: 'अथवा उसे मारना नहीं चाहिए। कामातुर कीचक के शव के साथ ही उसका दाह संस्कार कर देना चाहिए। मरने के बाद भी हमें सारथीपुत्र को जो प्रिय हो, वही करना चाहिए, जिससे उसकी आत्मा प्रसन्न हो।'॥6॥ | mahabharat अध्याय 4.23: उपकीचकोंका सैरन्ध्रीको बाँधकर श्मशानभूमिमें ले जाना और भीमसेनका उन सबको मारकर सैरन्ध्रीको छुड़ाना । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'अथवा उसे मारना नहीं चाहिए। कामातुर कीचक के शव के साथ ही उसका दाह संस्कार कर देना चाहिए। मरने के बाद भी हमें सारथीपुत्र को जो प्रिय हो, वही करना चाहिए, जिससे उसकी आत्मा प्रसन्न हो।'॥6॥
‘Or he should not be killed. He should be cremated along with the corpse of the lustful Keechak. Even after death, we should always do whatever is dear to the son of a charioteer, so that his soul is pleased.'॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥