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mahabharat 4.23.32: वैशम्पायन कहते हैं, "भरत! भीमसेन द्वारा मारे गए एक सौ पाँच उपकीचक वहाँ श्मशान में सो रहे थे, मानो कोई विशाल कटा हुआ वन गिरे हुए वृक्षों से भरा हुआ हो।" 32.   |   mahabharat अध्याय 4.23: उपकीचकोंका सैरन्ध्रीको बाँधकर श्मशानभूमिमें ले जाना और भीमसेनका उन सबको मारकर सैरन्ध्रीको छुड़ाना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 23: उपकीचकोंका सैरन्ध्रीको बाँधकर श्मशानभूमिमें ले जाना और भीमसेनका उन सबको मारकर सैरन्ध्रीको छुड़ाना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  4.23.32 
वैशम्पायन उवाच
पञ्चाधिकं शतं तच्च निहतं तेन भारत।
महावनमिवच्छिन्नं शिश्ये विगलितद्रुमम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं, "भरत! भीमसेन द्वारा मारे गए एक सौ पाँच उपकीचक वहाँ श्मशान में सो रहे थे, मानो कोई विशाल कटा हुआ वन गिरे हुए वृक्षों से भरा हुआ हो।" 32.
 
Vaishmpayana says, "Bharata! The one hundred and five Upakichakas killed by Bhimasena were sleeping there in the cremation ground as if a huge cut-down forest was filled with fallen trees." 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)