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mahabharat 4.23.30-31: भीरु! जो लोग तुम्हें, निरपराध स्त्री को कष्ट देंगे, वे इसी प्रकार मारे जाएँगे। कृष्ण! तुम नगर में जाओ। अब तुम्हें कोई भय नहीं है। मैं दूसरे मार्ग से विराट की रसोई में जाऊँगा।॥30-31॥   |   mahabharat अध्याय 4.23: उपकीचकोंका सैरन्ध्रीको बाँधकर श्मशानभूमिमें ले जाना और भीमसेनका उन सबको मारकर सैरन्ध्रीको छुड़ाना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 23: उपकीचकोंका सैरन्ध्रीको बाँधकर श्मशानभूमिमें ले जाना और भीमसेनका उन सबको मारकर सैरन्ध्रीको छुड़ाना  »  श्लोक 30-31
 
 
श्लोक  4.23.30-31 
एवं ते भीरु वध्यन्ते ये त्वां क्लिश्यन्त्यनागसम्।
प्रैहि त्वं नगरं कृष्णे न भयं विद्यते तव॥ ३०॥
अन्येनाहं गमिष्यामि विराटस्य महानसम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
भीरु! जो लोग तुम्हें, निरपराध स्त्री को कष्ट देंगे, वे इसी प्रकार मारे जाएँगे। कृष्ण! तुम नगर में जाओ। अब तुम्हें कोई भय नहीं है। मैं दूसरे मार्ग से विराट की रसोई में जाऊँगा।॥30-31॥
 
Bhiru! Those who will harass you, an innocent woman, will be killed in this manner. Krishna! Go to the city. Now there is no fear for you. I will go to Virat's kitchen by another route.'॥ 30-31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)