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श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 23: उपकीचकोंका सैरन्ध्रीको बाँधकर श्मशानभूमिमें ले जाना और भीमसेनका उन सबको मारकर सैरन्ध्रीको छुड़ाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  4.23.15 
वैशम्पायन उवाच
तस्यास्ता: कृपणा वाच: कृष्णाया: परिदेवितम्।
श्रुत्वैवाभ्यापतद् भीम: शयनादविचारयन्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: हे राजन! द्रौपदी के करुण वचन और करुण क्रंदन सुनकर भीमसेन बिना सोचे-समझे ही पलंग से कूद पड़े।
 
Vaishmpayana says: O King! On hearing Draupadi's pitiful words and her sad cries, Bhimasena jumped from the bed without thinking.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)