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श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 20: द्रौपदीद्वारा भीमसेनसे अपना दु:ख निवेदन करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  4.20.8 
स्थितं पूर्वं जलं यत्र पुनस्तत्रैव गच्छति।
इति पर्यायमिच्छन्ती प्रतीक्षे उदयं पुन:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जहाँ भी जल पहले ठहरा था, वहीं अब भी ठहरा है। इसी क्रम की कामना करते हुए, मैं पुनः उठने के समय की प्रतीक्षा करता हूँ। 8.
 
Wherever the water first settled, it still stays there. Desiring this sequence, I wait for the time of rising again. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)