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mahabharat 4.2.5: इससे राजा विराट के अन्य सेवक भी राजा के समान मेरा आदर करेंगे और मैं अपनी इच्छानुसार उनके लिए खाद्य पदार्थ, भोजन, रस और पेय पदार्थों का उपयोग कर सकूँगा ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 4.2: भीमसेन और अर्जुनद्वारा विराटनगरमें किये जानेवाले अपने अनुकूल कार्योंका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 2: भीमसेन और अर्जुनद्वारा विराटनगरमें किये जानेवाले अपने अनुकूल कार्योंका निर्देश  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  4.2.5 
राज्ञस्तस्य परे प्रेष्या मंस्यन्ते मां यथा नृपम्।
भक्ष्यान्नरसपानानां भविष्यामि तथेश्वर:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
इससे राजा विराट के अन्य सेवक भी राजा के समान मेरा आदर करेंगे और मैं अपनी इच्छानुसार उनके लिए खाद्य पदार्थ, भोजन, रस और पेय पदार्थों का उपयोग कर सकूँगा ॥5॥
 
By this means the other servants of King Virata will respect me like the king himself, and I will be able to use edible items, food items, juices and beverages as per my wish. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)