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श्लोक 4.2.31  |
युधिष्ठिरस्य गेहे वै द्रौपद्या: परिचारिका।
उषितास्मीति वक्ष्यामि पृष्टो राज्ञा च पाण्डव॥ ३१॥ |
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| अनुवाद |
| पाण्डुपुत्र! यदि राजा विराट मेरा परिचय पूछेंगे तो मैं उन्हें बता दूँगी कि मैं राजा युधिष्ठिर के घर में महारानी द्रौपदी की दासी रह चुकी हूँ। |
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| Son of Pandu! If King Virat asks for my introduction, I will tell him that I have been the maid* of Queen Draupadi in the house of King Yudhishthira. |
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