Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.2.30: कुन्तीनन्दन! मैं लोगों के अच्छे आचरण और विचारों तथा उनके द्वारा किये गए अनेकों सत्कर्मों का वर्णन करते हुए अपनी बुद्धि के द्वारा अपने वास्तविक स्वरूप को मायामयी नपुंसकता से छिपाकर रखूँगा। 30॥ | mahabharat अध्याय 4.2: भीमसेन और अर्जुनद्वारा विराटनगरमें किये जानेवाले अपने अनुकूल कार्योंका निर्देश । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुन्तीनन्दन! मैं लोगों के अच्छे आचरण और विचारों तथा उनके द्वारा किये गए अनेकों सत्कर्मों का वर्णन करते हुए अपनी बुद्धि के द्वारा अपने वास्तविक स्वरूप को मायामयी नपुंसकता से छिपाकर रखूँगा। 30॥
Kuntinandan! While describing the good conduct and thoughts of the people and the many good deeds done by them, I will keep my true nature hidden through my intellect from the illusory impotence. 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥