श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 2: भीमसेन और अर्जुनद्वारा विराटनगरमें किये जानेवाले अपने अनुकूल कार्योंका निर्देश  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  4.2.28 
पठन्नाख्यायिकाश्चैव स्त्रीभावेन पुन: पुन:।
रमयिष्ये महीपालमन्यांश्चान्त:पुरे जनान्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
मैं स्त्री का रूप धारण करके बार-बार पूर्ववर्ती राजाओं के जीवन के गीत गाऊंगी तथा राजा विराट और हरम की अन्य स्त्रियों का मनोरंजन करूंगी।
 
Hiding my form like a woman, I will repeatedly sing songs about the lives of previous kings and entertain King Virat and the other women of the harem.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas