Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.2.26-27: मैं अपने दोनों कानों में अग्नि के समान चमकने वाले कुण्डल पहनूँगी और हाथों में शंख की चूड़ियाँ धारण करूँगी। इस प्रकार तीसरी प्रकृति (नपुंसक प्रकृति) को धारण करके मैं अपना सिर जटाकर बृहन्नला नाम से प्रकट होऊँगी। 26-27॥ | mahabharat अध्याय 4.2: भीमसेन और अर्जुनद्वारा विराटनगरमें किये जानेवाले अपने अनुकूल कार्योंका निर्देश । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं अपने दोनों कानों में अग्नि के समान चमकने वाले कुण्डल पहनूँगी और हाथों में शंख की चूड़ियाँ धारण करूँगी। इस प्रकार तीसरी प्रकृति (नपुंसक प्रकृति) को धारण करके मैं अपना सिर जटाकर बृहन्नला नाम से प्रकट होऊँगी। 26-27॥
I will wear earrings glowing like fire in both my ears and hold conch shell bangles in my hands. In this way, by adopting the third nature (impotent nature), I will braid my head and declare myself by the name of Brihannala. 26-27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥