श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 2: भीमसेन और अर्जुनद्वारा विराटनगरमें किये जानेवाले अपने अनुकूल कार्योंका निर्देश  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  4.2.21 
यं मन्ये द्वादशं रुद्रमादित्यानां त्रयोदशम्।
वसूनां नवमं मन्ये ग्रहाणां दशमं तथा॥ २१॥
 
 
अनुवाद
मैं अर्जुन को, जिसे मैं बारहवाँ रुद्र और तेरहवाँ आदित्य मानता हूँ, नौवाँ वसु और दसवाँ ग्रह मानता हूँ ॥ 21॥
 
I accept Arjuna, whom I consider as the twelfth Rudra and the thirteenth Aditya, as the ninth Vasu and the tenth planet. ॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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