Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 4.2.20: पाँच वर्षों तक देवराज इन्द्र के महल में रहकर उन्होंने ऐसे दिव्य अस्त्र-शस्त्र प्राप्त किए हैं जो मनुष्यों के लिए दुर्लभ हैं। अपने दिव्य रूप से चमकने वाले अर्जुन ने अनेक दिव्य अस्त्र-शस्त्र प्राप्त किए हैं।   |   mahabharat अध्याय 4.2: भीमसेन और अर्जुनद्वारा विराटनगरमें किये जानेवाले अपने अनुकूल कार्योंका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 2: भीमसेन और अर्जुनद्वारा विराटनगरमें किये जानेवाले अपने अनुकूल कार्योंका निर्देश  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  4.2.20 
उषित्वा पञ्च वर्षाणि सहस्राक्षस्य वेश्मनि।
अस्त्रयोगं समासाद्य स्ववीर्यान्मानुषाद्‍भुतम्।
दिव्यान्यस्त्राणि चाप्तानि देवरूपेण भास्वता॥ २०॥
 
 
अनुवाद
पाँच वर्षों तक देवराज इन्द्र के महल में रहकर उन्होंने ऐसे दिव्य अस्त्र-शस्त्र प्राप्त किए हैं जो मनुष्यों के लिए दुर्लभ हैं। अपने दिव्य रूप से चमकने वाले अर्जुन ने अनेक दिव्य अस्त्र-शस्त्र प्राप्त किए हैं।
 
Having stayed in the palace of Devraj Indra for five years, he has obtained such divine weapons which are a rare thing for humans to have. Arjuna, who shines with his divine form, has obtained many divine weapons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)