| श्री महाभारत » पर्व 4: विराट पर्व » अध्याय 2: भीमसेन और अर्जुनद्वारा विराटनगरमें किये जानेवाले अपने अनुकूल कार्योंका निर्देश » श्लोक 13-14 |
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| | | | श्लोक 4.2.13-14  | योऽयमासाद्य तं दावं तर्पयामास पावकम्।
विजित्यैकरथेनेन्द्रं हत्वा पन्नगराक्षसान्॥ १३॥
वासुके: सर्पराजस्य स्वसारं हृतवांश्च य:।
श्रेष्ठो य: प्रतियोधानां सोऽर्जुन: किं करिष्यति॥ १४॥ | | | | | | अनुवाद | | जिसने खाण्डव दहन के समय एकमात्र रथ का आश्रय लेकर इन्द्र को परास्त किया, सर्पों और राक्षसों का वध करके अग्निदेव को संतुष्ट किया तथा अपनी अनुपम सुन्दरता से नागराज वासुकि की बहिन उलूपी का मन मोह लिया तथा जो आमने-सामने युद्ध करने वाले शूरवीरों में श्रेष्ठ है, वह अर्जुन वहाँ क्या करेगा?॥13-14॥ | | | | The one who, at the time of Khandava burning, taking shelter of the only chariot, defeated Indra, satisfied Agnidev by killing the serpents and demons, and with his matchless beauty stole the heart of Ulupi, the sister of Serpent King Vasuki, and who is the best among the brave men fighting face to face, what will that Arjun do there?॥ 13-14॥ | | ✨ ai-generated | | |
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