श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 2: भीमसेन और अर्जुनद्वारा विराटनगरमें किये जानेवाले अपने अनुकूल कार्योंका निर्देश  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.2.10 
आत्मानमात्मना रक्षंश्चरिष्यामि विशाम्पते।
इत्येतत् प्रतिजानामि विहरिष्याम्यहं यथा॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! मैं अपनी रक्षा करता हुआ विराट नगर जाऊँगा। मुझे विश्वास है कि मैं वहाँ सुखपूर्वक रह सकूँगा॥10॥
 
O King, I shall go to Virat's city while protecting myself. I am sure that I shall be able to live there happily.॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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