श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 2: भीमसेन और अर्जुनद्वारा विराटनगरमें किये जानेवाले अपने अनुकूल कार्योंका निर्देश  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.2.1 
भीमसेन उवाच
पौरोगवो ब्रुवाणोऽहं बल्लवो नाम भारत।
उपस्थास्यामि राजानं विराटमिति मे मति:॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन बोले, "हे भरतवंशी वीर! मैं राजा विराट के दरबार में पौरोघव (रसोई का अध्यक्ष) बनकर उपस्थित होऊंगा तथा अपना परिचय बल्लव (वल्लव) के रूप में दूंगा। यही मेरा उद्देश्य है।"
 
Bhimasena said, "O brave warrior of Bharat dynasty! I will present myself in the court of King Virata as Pauroghav (president of the kitchen) and introducing myself as Ballav (Vallaav). This is my intention."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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