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mahabharat 4.19.36: जब मैं गेरू आदि लाल रंग के आभूषणों से विभूषित और ग्वालों को आगे बढ़ाते हुए सहदेव को दुःखी होते हुए भी राजा विराट को नमस्कार करते देखता हूँ, तब मुझे ज्वर आ जाता है ॥ 36॥   |   mahabharat अध्याय 4.19: पाण्डवोंके दु:खसे दु:खित द्रौपदीका भीमसेनके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 19: पाण्डवोंके दु:खसे दु:खित द्रौपदीका भीमसेनके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  4.19.36 
संरब्धं रक्तनेपथ्यं गोपालानां पुरोगमम्।
विराटमभिनन्दन्तमथ मे भवति ज्वर:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
जब मैं गेरू आदि लाल रंग के आभूषणों से विभूषित और ग्वालों को आगे बढ़ाते हुए सहदेव को दुःखी होते हुए भी राजा विराट को नमस्कार करते देखता हूँ, तब मुझे ज्वर आ जाता है ॥ 36॥
 
When I see Sahadeva, adorned with red coloured ornaments like ochre etc. and leading the cowherds, greeting King Virata in spite of being distressed, I get a fever. ॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)