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mahabharat 4.19.28: जब मैं धर्म, पराक्रम और सत्यभाषण के मामले में सम्पूर्ण चराचर जगत के लिए आदर्श अर्जुन को स्त्री के वेश में विकृत देखता हूँ, तब मेरा हृदय दुःख से भर जाता है ॥28॥   |   mahabharat अध्याय 4.19: पाण्डवोंके दु:खसे दु:खित द्रौपदीका भीमसेनके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 19: पाण्डवोंके दु:खसे दु:खित द्रौपदीका भीमसेनके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  4.19.28 
धर्मे शौर्ये च सत्ये च जीवलोकस्य सम्मतम्।
स्त्रीवेषविकृतं पार्थं दृष्ट्वा सीदति मे मन:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
जब मैं धर्म, पराक्रम और सत्यभाषण के मामले में सम्पूर्ण चराचर जगत के लिए आदर्श अर्जुन को स्त्री के वेश में विकृत देखता हूँ, तब मेरा हृदय दुःख से भर जाता है ॥28॥
 
When I see Arjuna, who was a role model for the entire living world in terms of Dharma, valor and speaking the truth, now disfigured in the guise of a woman, my heart is filled with sorrow. ॥28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)