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mahabharat 4.19.18: उसके धनुष की ध्वनि से सारे शत्रु काँप उठते थे, आज भीतरी महल की स्त्रियाँ उसके गीतों की ध्वनि सुनकर प्रसन्न होती हैं।   |   mahabharat अध्याय 4.19: पाण्डवोंके दु:खसे दु:खित द्रौपदीका भीमसेनके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 19: पाण्डवोंके दु:खसे दु:खित द्रौपदीका भीमसेनके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  4.19.18 
यस्य ज्यातलनिर्घोषात् समकम्पन्त शत्रव:।
स्त्रियो गीतस्वनं तस्य मुदिता: पर्युपासते॥ १८॥
 
 
अनुवाद
उसके धनुष की ध्वनि से सारे शत्रु काँप उठते थे, आज भीतरी महल की स्त्रियाँ उसके गीतों की ध्वनि सुनकर प्रसन्न होती हैं।
 
The sound of his bow used to make all enemies tremble, today the women of the inner palace listen to the sound of his songs and become happy. 18.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)