Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.18.d3: हे शत्रुओं को संताप देने वाले महाबाहु भीम! उस समय कर्ण, दुर्योधन, मेरे दोनों ससुर भीष्म, बुद्धिमान विदुर, द्रोणाचार्य और कृपाचार्य आदि क्षत्रियों ने भी मुझे उस दयनीय अवस्था में देखा। | mahabharat अध्याय 4.18: द्रौपदीका भीमसेनके प्रति अपने दु:खके उद्गार प्रकट करना । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(क्षत्रियैस्तत्र कर्णाद्यैर्दृष्टा दुर्योधनेन च।
श्वशुराभ्यां च भीष्मेण विदुरेण च धीमता॥
द्रोणेन च महाबाहो कृपेण च परंतप।
अनुवाद
हे शत्रुओं को संताप देने वाले महाबाहु भीम! उस समय कर्ण, दुर्योधन, मेरे दोनों ससुर भीष्म, बुद्धिमान विदुर, द्रोणाचार्य और कृपाचार्य आदि क्षत्रियों ने भी मुझे उस दयनीय अवस्था में देखा।
O mighty-armed Bhima, who torments his enemies! At that time, the Kshatriyas like Karna, Duryodhan, my two father-in-laws Bhishma, the wise Vidur, Dronacharya and Kripacharya also saw me in that pitiable state.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥