Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 4.16.d44: पिता युवावस्था में स्त्री की रक्षा करता है, पति युवावस्था में और पुत्र वृद्धावस्था में स्त्री की रक्षा करता है। स्त्री को कभी भी स्वतंत्र नहीं रहना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 4.16: कीचकद्वारा द्रौपदीका अपमान   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 16: कीचकद्वारा द्रौपदीका अपमान  »  श्लोक d44
 
 
श्लोक  4.16.d44 
पिता रक्षति कौमारे भर्ता रक्षति यौवने।
पुत्रस्तु स्थविरे भावे न स्त्री स्वातन्त्र्यमर्हति॥
 
 
अनुवाद
पिता युवावस्था में स्त्री की रक्षा करता है, पति युवावस्था में और पुत्र वृद्धावस्था में स्त्री की रक्षा करता है। स्त्री को कभी भी स्वतंत्र नहीं रहना चाहिए।
 
The father protects the woman in her youth, the husband in her youth and the son in her old age. A woman should never remain independent.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)