Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.16.d11-d12: जो लोग अपने प्रियजनों और शत्रुओं के साथ समान व्यवहार करते हैं, तथा जो राजा धर्म के सिंहासन पर बैठकर प्रजा में विवाद होने पर समभाव से विचार करते हैं, वे दोनों लोकों को जीत लेते हैं। | mahabharat अध्याय 4.16: कीचकद्वारा द्रौपदीका अपमान । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रियेष्वपि च द्वेष्येषु समत्वं ये समाश्रिता:॥
विवादेषु प्रवृत्तेषु समं कार्यानुदर्शिना।
राज्ञा धर्मासनस्थेन जितौ लोकावुभावपि॥
अनुवाद
जो लोग अपने प्रियजनों और शत्रुओं के साथ समान व्यवहार करते हैं, तथा जो राजा धर्म के सिंहासन पर बैठकर प्रजा में विवाद होने पर समभाव से विचार करते हैं, वे दोनों लोकों को जीत लेते हैं।
Those who treat their loved ones and their haters equally, and those kings who sit on the throne of Dharma and deliberate on every issue with equanimity when a dispute arises among their subjects, they conquer both the worlds.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥