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(द्रौपद्युवाच
प्रजारक्षणशीलानां राज्ञां ह्यमिततेजसाम्।
कार्यं हि पालनं नित्यं धर्मे सत्ये च तिष्ठताम्॥
स्वप्रजायां प्रजायां च विशेषं नाधिगच्छताम्।
अनुवाद
द्रौपदी ने कहा: जो श्रेष्ठ राजा स्वभाव से ही प्रजा की रक्षा में लगे रहते हैं, जो सदा धर्म और सत्य के मार्ग पर स्थित रहते हैं तथा जो प्रजा और अपनी सन्तान में कोई भेद नहीं करते, उन्हें सदैव अपने आश्रितों की सहायता और रक्षा करनी चाहिए।
Draupadi said: Those illustrious kings, who by nature are engaged in the protection of the subjects, who are always established in the path of virtue and truth and who do not make any difference between the subjects and their own children, should always support and protect those who are dependent on them.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥