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mahabharat 4.16.d1: द्रौपदी बोली, "अरे मूर्ख! जैसे निषाद ब्राह्मण स्त्री को नहीं छू सकता, वैसे ही तू मुझे भी नहीं छू सकता। मेरा अपमान करके घोर विपत्ति में मत पड़।"   |   mahabharat अध्याय 4.16: कीचकद्वारा द्रौपदीका अपमान   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 16: कीचकद्वारा द्रौपदीका अपमान  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  4.16.d1 
द्रौपद्युवाच
(नाहं शक्या त्वया स्प्रष्टुं निषादेनेव ब्राह्मणी।
मा गमिष्यसि दुर्बुद्धे गतिं दुर्गान्तरान्तराम्॥
 
 
अनुवाद
द्रौपदी बोली, "अरे मूर्ख! जैसे निषाद ब्राह्मण स्त्री को नहीं छू सकता, वैसे ही तू मुझे भी नहीं छू सकता। मेरा अपमान करके घोर विपत्ति में मत पड़।"
 
Draupadi said, "You fool! Just like a Nishad cannot touch a Brahmin woman, you cannot touch me either. Do not fall into the gravest misfortune by insulting me."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)