Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.16.7: वैशम्पायन कहते हैं - हे राजन! द्रौपदी को बड़ी-बड़ी आँखों से इस प्रकार डाँटते देख कीचक ने उसे पकड़ना चाहा, किन्तु वह सहसा झटके से पीछे की ओर हटने लगी; इतने में ही कीचक ने उस पर झपट्टा मारा और उसके दुपट्टे का छोर पकड़ लिया। | mahabharat अध्याय 4.16: कीचकद्वारा द्रौपदीका अपमान । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
स तामभिप्रेक्ष्य विशालनेत्रां
जिघृक्षमाण: परिभर्त्सयन्तीम्।
जग्राह तामुत्तरवस्त्रदेशे
स कीचकस्तां सहसाऽऽक्षिपन्तीम्॥ ७॥
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - हे राजन! द्रौपदी को बड़ी-बड़ी आँखों से इस प्रकार डाँटते देख कीचक ने उसे पकड़ना चाहा, किन्तु वह सहसा झटके से पीछे की ओर हटने लगी; इतने में ही कीचक ने उस पर झपट्टा मारा और उसके दुपट्टे का छोर पकड़ लिया।
Vaishmpayana says - O King! Seeing Draupadi with big eyes rebuking him in this manner, Keechak wanted to catch hold of her, but she suddenly jerked and started to move backwards; in the meantime Keechak pounced upon her and caught hold of the end of her scarf.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥