Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 4.16.33: कीचक को धर्म का कुछ भी ज्ञान नहीं है और यह राजा मत्स्य भी किसी प्रकार धर्म को नहीं जानता है तथा इस अधर्मी राजा के पास जो सभासद बैठते हैं, वे भी धर्म को नहीं जानते हैं।’ ॥33॥ | mahabharat अध्याय 4.16: कीचकद्वारा द्रौपदीका अपमान । mahabharat पर्व 4: विराट पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कीचको न च धर्मज्ञो न च मत्स्य: कथंचन।
सभासदोऽप्यधर्मज्ञा य एनं पर्युपासते॥ ३३॥
अनुवाद
कीचक को धर्म का कुछ भी ज्ञान नहीं है और यह राजा मत्स्य भी किसी प्रकार धर्म को नहीं जानता है तथा इस अधर्मी राजा के पास जो सभासद बैठते हैं, वे भी धर्म को नहीं जानते हैं।’ ॥33॥
Kichaka has no knowledge of Dharma and this King Matsya also does not know Dharma in any way and the members of the court who sit near this unrighteous King are also not aware of Dharma.' ॥ 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥