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श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 15: रानी सुदेष्णाका द्रौपदीको कीचकके घर भेजना  »  श्लोक d8
 
 
श्लोक  4.15.d8 
सैरन्ध्रॺा ह्येतदाख्यातं मम तेषां महद् बलम्।
तव चाहमिदं गुह्यं स्नेहादाख्यामि बन्धुवत्॥
 
 
अनुवाद
सैरंध्री ने स्वयं मुझे उसके महान बल के बारे में बताया है। भ्रातृ-स्नेह के कारण मैंने यह रहस्य तुम्हारे साथ साझा किया है।
 
Sairandhri herself has told me about his great strength. Due to brotherly affection I have shared this secret with you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)