श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 15: रानी सुदेष्णाका द्रौपदीको कीचकके घर भेजना  »  श्लोक d25
 
 
श्लोक  4.15.d25 
वैशम्पायन उवाच
सा तमाह विनि:श्वस्य प्रतिगच्छ स्वकं गृहम्।
एषाहमपि सैरन्ध्रीं सुरार्थे तूर्णमादिशे॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं- जनमेजय! तब सुदेष्णा ने गहरी साँस लेकर उससे कहा- 'तुम अपने घर लौट जाओ। मैं सैरंध्री को वहाँ से शीघ्र ही मदिरा लाने का आदेश दूँगी।'
 
Vaishampayana says- Janamejaya! Then Sudeshna took a deep breath and said to him- 'You go back to your home. I will order Sairandhri to bring wine from there soon'.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)