vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 4: विराट पर्व
»
अध्याय 15: रानी सुदेष्णाका द्रौपदीको कीचकके घर भेजना
»
श्लोक d11
श्लोक
4.15.d11
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्तस्तु दुष्टात्मा भगिनीं कीचकोऽब्रवीत्।
अनुवाद
वैशम्पायन जी कहते हैं-राजन्! सुदेष्णा के ऐसा कहने पर दुष्टात्मा कीचक अपनी बहन से बोला.
Vaishmpayana ji says - King! When Sudeshna said this, the evil soul Kichak spoke to his sister.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×