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mahabharat 4.15.5: कीचक! किसी उत्सव या उत्सव पर जब तुम अपने घर में मदिरा और भोजन तैयार करोगे, तब मैं वहाँ से मदिरा लाने के बहाने इस सैरंध्री को तुम्हारे पास भेज दूँगा।॥5॥   |   mahabharat अध्याय 4.15: रानी सुदेष्णाका द्रौपदीको कीचकके घर भेजना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 15: रानी सुदेष्णाका द्रौपदीको कीचकके घर भेजना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  4.15.5 
पर्वणि त्वं समुद्दिश्य सुरामन्नं च कारय।
तत्रैनां प्रेषयिष्यामि सुराहारीं तवान्तिकम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
कीचक! किसी उत्सव या उत्सव पर जब तुम अपने घर में मदिरा और भोजन तैयार करोगे, तब मैं वहाँ से मदिरा लाने के बहाने इस सैरंध्री को तुम्हारे पास भेज दूँगा।॥5॥
 
Kichak! On some festival or celebration, you prepare wine and food items in your house. Then I will send this Sairandhri to you on the pretext of bringing wine from there. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)