भयभीत द्रौपदी को भयभीत हिरणी के समान आते देख सारथी कीचक हर्ष से भरकर उठ खड़ा हुआ, मानो नदी पार करते हुए कोई यात्री नाव पाकर प्रसन्न हो जाता है।
Seeing the frightened Draupadi approaching like a scared deer, the charioteer Kichaka stood up filled with joy, as if a traveller crossing a river were happy to have found a boat.
इति श्रीमहाभारते विराटपर्वणि कीचकवधपर्वणि द्रौपदीसुराहरणे पञ्चदशोऽध्याय:॥ १५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत विराटपर्वके अन्तर्गत कीचकवधपर्वमें द्रौपदीके द्वारा मदिरानयनसम्बन्धी पंद्रहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २५ श्लोक मिलाकर कुल ४६ श्लोक हैं।)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥