श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 15: रानी सुदेष्णाका द्रौपदीको कीचकके घर भेजना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  4.15.18 
सैरन्ध्रॺुवाच
यथाहमन्यं भर्तृभ्यो नाभिजानामि कंचन।
तेन सत्येन मां प्राप्तां मा कुर्यात् कीचको वशे॥ १८॥
 
 
अनुवाद
सैरन्ध्री बोली - हे प्रभु! यदि मैं अपने पतियों को छोड़कर अन्य किसी पुरुष का चिन्तन नहीं करूँगी, तो इस सत्य के कारण कीचक अपने घर आई हुई मुझ असहाय स्त्री को वश में नहीं कर सकेगा॥18॥
 
Sairandhri said - O Lord! If I do not think of any other man except my husbands, then due to this truth Keechak will not be able to control me, the helpless woman who has come to his house.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)