vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 4: विराट पर्व
»
अध्याय 15: रानी सुदेष्णाका द्रौपदीको कीचकके घर भेजना
»
श्लोक 10
श्लोक
4.15.10
सुदेष्णोवाच
उत्तिष्ठ गच्छ सैरन्ध्रि कीचकस्य निवेशनम्।
पानमानय कल्याणि पिपासा मां प्रबाधते॥ १०॥
अनुवाद
सुदेष्णा बोली - सैरन्ध्री! उठकर कीचक के घर जाओ। कल्याणी! मुझे बड़ी प्यास लगी है; इसलिए वहाँ से मेरे लिए कुछ रस ले आओ जिसे मैं पी सकूँ॥10॥
Sudeshna said— Sairandhri! Get up and go to Keechak's house. Kalyani! I am very thirsty; so bring me some juice from there that I can drink.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×